जय श्री राधे कृष्ण!
एकादशी व्रत की बात ही कुछ और है, है ना? आषाढ़ महीने के कृष्ण पक्ष में जो एकादशी आती है, वही है योगिनी एकादशी—एक खास दिन, जब भगवान श्री हरि विष्णु और हमारे प्यारे श्री कृष्ण की आराधना का अद्भुत अवसर मिलता है। तो चलिए, जानते हैं कि ये योगिनी एकादशी आखिर है क्या, कौन-से भक्त इसे रखते हैं और आप इसका असली लाभ मंदिर के साथ कैसे उठा सकते हैं।
योगिनी एकादशी क्या है?
योगिनी एकादशी का व्रत कौन रखता है?
भगवान श्री कृष्ण की राह हर भक्त के लिए खुली है, जो दिल से श्रद्धा में डूबा हो। योगिनी एकादशी का व्रत खासकर ये लोग रखते हैं—
1. जो
श्री राधे कृष्ण के
चरणों में पूरी तरह
समर्पित हैं, वो इसे
अपना धर्म समझकर रखते
हैं।
2. जिनको
शारीरिक कष्ट हैं, खासकर
त्वचा रोग या कोई
ऐसी बीमारी जो आसानी से
ठीक नहीं होती।
3. अगर
आपके जीवन में कोई
गलती या पाप हो
गया है, तो इस
व्रत से उनके प्रायश्चित
का रास्ता खुलता है।
4. जो सुख-शांति, सुख संपत्ति या मोक्ष चाहते हैं—चाहे गृहस्थ हो या संन्यासी।
योगिनी एकादशी की कहानी
स्वर्ग के अलकापुरी में कुबेर राज करते थे—बड़े शिवभक्त। उनके लिए हेमराज नाम का माली रोज मानसरोवर से फूल लाता था। एक दिन माली अपनी पत्नी में इतना खो गया कि फूल लाना भूल गया। कुबेर को गुस्सा आ गया, उन्होंने श्राप दे दिया—जा, पृथ्वी पर कुष्ठ रोग भोग!
बेचारा हेमराज धरती पर भटकने लगा, तकलीफें झेलीं, फिर महर्षि मार्कण्डेय के आश्रम पहुंचा। ऋषि ने उसकी पूरी बात सुनी और योगिनी एकादशी का व्रत रखने को कहा। माली ने व्रत रखा और उसका रोग ठीक हो गया। वो दोबारा अपने दिव्य रूप में स्वर्ग लौट गया।
व्रत के नियम और पूजा विधि
अब अगर आप भी योगिनी एकादशी व्रत रखना चाहते हैं, तो ये बातें ध्यान रखें—
- दशमी
की रात से ही
लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन
छोड़ दें।
- एकादशी
के दिन सुबह जल्दी
उठिए, स्नान करके राधे कृष्ण
के सामने व्रत का संकल्प
लें।
- भगवान
को भोग लगाते वक्त
तुलसी की पत्ती जरूर
दें, लेकिन एकादशी के दिन तुलसी
नहीं तोड़ते—एक दिन पहले
ही तोड़कर रख लें।
- चावल
खाना और घर में
बनाना पूरा मना है,
चाहे व्रत रखें या
न रखें।
- इस
दिन अनाज नहीं खाते।
फल, दूध, साबूदाना या
कुट्टू का आटा चलेगा।
मंदिर से कैसे जुड़ें?
एकादशी के दिन नाम-जप और कीर्तन सबसे ऊंची सेवा है। आप चाहें तो मंदिर आइए, श्री राधे कृष्ण के दर्शनों का सुख लें, पीले रंग के फूल, फल और तुलसी की माला अर्पित करें। शाम को मंदिर में होनेवाले महा-संकीर्तन में भी शामिल हो सकते हैं। शास्त्र कहते हैं—एक योगिनी एकादशी का व्रत रखना, 88 हज़ार ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य देता है।
तो इस योगिनी एकादशी पर, सब मिलकर श्री कृष्ण से प्रार्थना करें कि हमारे जीवन के सभी दुख दूर हों। कमेंट में जय श्री राधे कृष्ण लिखकर अपनी हाजिरी लगाएं और पोस्ट को बाकी भक्तों तक भी जरूर पहुंचाएं।
